Feb, 17, 2020
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सपा और बसपा के बीच सब ठीक नहीं ? बिना सहमति के बसपा ने जौनपुर से उतारा अपना प्रत्याशी

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National Desk : बसपा और सपा एक साथ चुनाव लड़ने का तो फैसला किया है लेकिन फिलहाल दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं दिखा रहा है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के हालिया फैसला से दोनों पार्टियों के बीच बात बिगड़ सकती है

मायावती ने जौनपुर से प्रत्याशी उतारकर अपने सहयोगी समाजवादी पार्टी को झटका दे दिया है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन कर बसपा का इरादा भाजपा को सत्ता से बाहर करने का है। 

खबरों की माने तो मायावती के इस कदम से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव नाराज है हालाकि अखिलेश यादव ने अभी  मामले पर कोई बयान नहीं दिया है लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव जौनपुर से अपने भाई तथा मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप सिंह यादव उर्फ तेजू को उतारना चाहते थे। 

जबकि मायावती ने जौनपुर से अपना प्रत्याशी श्याम सिंह यादव को उम्मीदवार बना दिया। पीसीएस अधिकारी श्याम सिंह यादव को जौनपुर लोकसभा से उम्मीदवार बनाया गया है। 65 वर्ष के श्याम सिंह यादव रानी पट्टी, ब्लाक मडिय़ाहूं, जौनपुर के निवासी हैं।

हाल ही में मायावती ने अपने लोकसभा चुनाव के लिए 16 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की जिसमे श्याम सिंह यादव के नाम  ऐलान किया और अपनी सहयोगी पार्टी को बड़ा झटका दिया। 

 जौनपुर से समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी उतारना चाहती थी, लेकिन उससे पहले ही बसपा ने यहां से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। समाजवादी पार्टी चाहती थी कि बसपा यहां से अपना प्रत्याशी न उतारे। वह इस सीट के बदले बलिया की सीट बसपा को देने को तैयार थी।

 समाजवादी पार्टी जौनपुर में तेज प्रताप सिंह यादव को चुनाव लड़ाने  सोच ही रही थी कि मायावती ने एसपी प्रमुख की इस मांग को कोई तवज्जो ना देते हुए अपना उमीदवार उतार दिया। 

समाजवादी पार्टी ने तेज प्रताप की सीट मैनपुरी से इस बार सपा ने मुलायम सिंह यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है और मुलायम सिंह यादव अपना नामांकन भी भर चुके है जिसे अब वह अपना नाम भी वापस नहीं ले सकते जिससे अब तेज प्रताप के पास कोई भी सुरक्षित सीट नहीं बची है। एसपी प्रमुख ने मैनपुरी से टिकट अपने पिता मुलायम सिंह यादव को दिया है। यही नहीं यहां से एसपी के दिग्गज नेता पारसनाथ यादव भी चुनाव लडऩा चाहते थे। 

वहीं तेज प्रताप मैनपुरी से टिकट काटे जाने से नाराज हैं। उनके समर्थकों ने यहां प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद उनके समर्थक जिला इकाई को भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भंग कर दिया है। कुल मिलाकर बसपा  के नए ऐलान के बाद से सपा की मुसीबत बढ़ गई है। 

वहीं बीएसपी ने जिन 16 सीटों के नामों का ऐलान किया है उसमें बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का भी नाम है। एसपी प्रमुख अखिलेश यादव ने कभी अंसारी बंधुओं को पार्टी में लेने से मना कर दिया था और वह माफिया को टिकट देने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन बसपा से गठबंधन  शामिल सपा का अब यह नियम नहीं चल सका। 

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