Feb, 19, 2020
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दुनिया को सुन सकेगी अब नन्ही शिवानी

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Maharashtra Desk : वसई के एवरशाइन नगर की रहने वाली ढाई साल की शिवानी को जन्म से ही श्रवणदोष (बहरापन) था. डाक्टर द्वारा कराये गये सभी टेस्ट और रिपोर्ट के बाद शिवानी के दोनो कानो पर कॉकलीयर इप्लांट ऑपरेशन ही एकमात्र इलाज था और उस दोनो कानों के ऑपरेशन और मशीनो के लिए कुल 15 लाख रूपये का खर्च हास्पिटल द्वारा बताया गया था.

तामिळनाडू राज्य मे जन्मी शिवानी की माँ बचपन में ही गुजर गयी है और पिताजी उसकी जिम्मेदारी से अपना मुँह फेर‍ गांव भाग गये है। इसलिए शिवानी अभी अपने नाना -नानी और मामा के पास रहती है। 60 साल पार कर चुके उसके नाना-नानी शिवानी के इलाज की मदत के लिए दर दर भटक रहे थे। लेकीन इलाज के खर्चे की इतनी बडी रकम जमा करना करीब करीब मुश्किल था।

डॉ. मिलींद किर्तने

लेकिन बहुजन विकास आघाडी के फ्री स्वास्थ्य कैंम्प और डॉ. मिलींद किर्तने की मदद से शिवानी का ऑपरेशन संभव हो गया जिसके बाद अब आने वाले समय में शिवानी बाकी लोगों की तरह सुन सकेगी. शिवानी की सफलता को देखते हुए वह कहावत याद आती है कि जिसका कोई नही होता उसके लिए भगवान अपने फरिश्ते भेजता है।  

वहीं इससे पहले साई दुर्गा मित्र मंडळ की तरफ से आयोजित मुफ्त स्वास्थय कैंम्प में कॉकलीयर इप्लांट इलाज को शामिल किया गया था जिसमें जुंचद्र-नायगाव के हितेश भोईर की चार साल की बेटी आराध्या का इलाज संभव हुआ था. आराध्या को भी बचपन से ही बहरापन की शिकायत थी जिसके लिए हितेश भोईर ने करीब करीब मुंबई और आसपास के सभी अस्पतालों का चक्कर लगाया था.  

कुछ बच्चों में जन्म से ही सुनने की क्षमता नहीं होती लेकिन उसका पता करीब 2 साल के बाद ही चलता है और उसके बाद इलाज के लिए तैयारी करने और इलाज कराने में और भी करीब 2 साल का समय निकल जाता है, नतीजा बच्चे की ग्रोथ लेट होती है. इसलिए जन्म के समय से ही सभी अस्पतालो में श्रवण जाँच होना जरुरी है ऐसा कहना है पद्मश्री डॉ. मिलींद किर्तने का.  

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