Oct, 16, 2019
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निजी विश्वविद्यालयों पर होगी सरकार की पकड़

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National Desk : उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नया अध्यादेश जारी किया है जिसके दायरे में अब प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ होगी, योगी आदित्यनाथ सरकार के प्राइवेट यूनिवर्सिटीड ऑर्डिनेंस 2019 के मुताबिक अब प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को एक शपथ पत्र देना होगा कि यूनिवर्सिटी किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और न ही कैंपस में इस तरह की गतिविधियां होने देगी।

अगर ऐसा हुआ तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा और सरकार यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस नए अध्यादेश के तहत यूपी के सभी 27 प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक कानून के अंदर आ जाएंगी। हालांकि इसके बारे में अभी पूरी तरह से जानकारी साझा नहीं हो पायी है।

यह अध्यादेश मंगलवार को योगी मंत्रिमंडल द्वारा पारित किया गया, अध्यादेश अब विधानसभा सत्र में रखा जाएगा, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है कि विश्वविद्यालयों में सिर्फ शिक्षा दी जाए ना कि वहां राष्ट्र विरोध गतिविधियों को पैदा किया जाए।

डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के किसी भी विश्वविद्यालय हो या शैक्षिक संस्थान में राष्ट्रविरोधी गतिविधि हो उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में निर्णय लिया है कि शिक्षा के मंदिर में सिर्फ शिक्षा का ही काम होना चाहिए।

इस अध्यादेश का उद्देश्य इन विश्वविद्यालयों के कामकाज और शैक्षणिक स्तर में सुधार लाना है विश्वविद्यालयों को 50 प्रतिशत शुल्क पर गरीब समुदायों के विशिष्ट छात्रों के लिए प्रवेश सुनिश्चित करना होगा और 75 प्रतिशत संकायों को स्थायी कर्मचारियों के रूप में रखना होगा, ये प्रावधान राज्य सरकार को निजी विश्वविद्यालयों की वित्तीय और अकादमिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए और अधिक शक्ति देंगे।

इसके साथ ही अध्यादेश में यह भी कहा गया है कि ‘विश्वविद्यालयों को राज्य सरकार की पूर्वानुमति के बिना मानद उपाधि देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा शासी निकाय के परामर्श के बाद ही की जा सकती है अध्यादेश में यह प्रस्ताव किया गया है कि विश्वविद्यालय के लिए जमीन बेची नहीं जा सकती व हस्तांतरित या पट्टे पर नहीं दी जा सकती, हालांकि इसे विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किसी बैंक या वित्तीय संस्थान को गिरवी रखा जा सकता है। हालांकि विपक्षी दलों द्वारा इसका विरोध भी शुरु हो गया है। लेकिन सरकार अभी तक अपने रवैये पर अटल है। 

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