Feb, 20, 2020
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नवरात्री के नौवें दिन का महत्व

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Religiouse Desk : आज चैत्र की नवरात्री का नौवा और आखिरी दिन है, नवरात्री के नवमी तिथि को माँ सिद्धिदात्री की साधना उपासना की जाती है। यह देवी का पूर्ण सवरूप मन जाता है। चैत्र की नवमी के दिन माता की पूजा के साथ-साथ रामनमी भी मनाई जाती है और राम जी की पूजा की जाती है। कई लोग साल में एक बार जो धाजा फेर किया जाता है वो अधिकांस्तर रामनमी को ही किया जाता है, यानि चैत्र की नवमी के दिन।

माता सिद्धिदात्री के पूजा का फल:-

माता की पूजा में नवमी वाले दिन की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस पूजा से जो फल मिलता है उसके अनुसार किसी भी तरह के युद्ध में विजय की प्राप्ति हो जाती है। 

बहुत लोग माँ सरवस्ती के लिए भी इस दिन साधना और उपासना करते है जिससे बुद्धि और विद्या बढ़ती है। 

माता सिद्धिदात्री का रूप वर्णन:-

माता कमल के आसन पर विराजमान है, और उनके हाथो में शंख, चक्र, गदा और पद्ध है। यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, नाग, देवी-देवता और मनुष्य भी इनकी कृपा से सिद्धियों को प्राप्त करते है। 

माता की पूजा और भोग :-

माता की पूजा विशेष तोर पर आज की जाती है, आज की पूजा में सप्तशती पाठ को ख़त्म किया जाता है और साथ ही हवन कर के माता की आरती कर पूजा को संपन्न किया जाता है। कुवारी कन्याओ को भोजन कराया जाता है। 

माता को चना-पूरी, हलवा, खीर और पुए कभोग लगा फिर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करे। गरोबो को भी दान में दे। 

जाप के लिए मन्त्र :-

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।   

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