Feb, 19, 2020
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महूबूबा मुफ्ती ने दी पीएम को नसीहत

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National Desk : जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर लड़ाई हर दिन बढ़ती नजर आ रही है बीजेपी और पीडीपी के बीच खत्म हुए गठबंधन के बाद से दोनों पार्टियां खुद को कश्मीर के लिए हितैसी बता रही है जबकि दोनों एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी भी कर रही है।

पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री पर एक बयान को लेकर पलटवार किया करते हुए कहा कि अगर पीएम मोदी को लगता है कि कश्‍मीर खतरे में है तो फिर वह इस खतरे को छोड़ दें, उन्हे लगता है कि आर्टिकल 370 के आधार पर हमारे रिश्‍ते की बुनियाद है तो कश्‍मीर को छोड़ दें. अब वो कैसे छोड़ना चाहते हैं और क्‍यों खतरा मोल लेना चाहते हैं इतने सालों से।

अपने बयानों के हमले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस और नैशनल कॉन्‍फ्रेंस को भी नहीं छोड़ा, महबूबा ने दोनों पार्टियों पर आर्टिकल 370 को कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि यह आर्टिकल जम्मू -कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता है।

महबूबा ने कहा कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने 2008 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड को हजारों कनाल भूमि आवंटित कर आर्टिकल 370 को कमजोर किया था और एनसी ने 1975 में वजीर-ए-आजम और सदर-ए-रियासत का खिताब खत्म कर इस आर्टिकल को कमजोर किया था।

पीडीपी अध्यक्षा ने कहा कि उनकी पार्टी ने बीजेपी के साथ राज्य में गठबंधन में सरकार बनाकर आर्टिकल 370 और 35ए को बचाया था। आपको बता दें कि महबूबा अनंतनाग संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं, जहां तीन चरणों में होने वाले मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल को हुआ था।

दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को और तीसरे और अंतिम चरण का मतदान छह मई को होना है। इस बार महबूबा का मुकाबला कांग्रेस के गुलाम अहमद मीर और एनसी उम्मीदवार रिटायर्ड जज हसनैन मसूदी के साथ होना है। 

इससे पहले एक न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्‍यू में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जम्‍मू-कश्‍मीर में एक मुट्ठी भर परिवार ने राज्‍य के लोगों को ब्‍लैकमेल करने का रास्‍ता चुना हुआ है। ये लोग कश्‍मीर में एक भाषा बोलते हैं तो दिल्‍ली में दूसरी।

इनका दोगलापन उजागर करना होगा। इनके अंदर दोनों जगह एक ही भाषा बोलने की हिम्‍मत होनी चाहिए। जम्‍मू-कश्‍मीर में सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का ही फॉर्म्‍युला काम आएगा। इंसानियत, कश्‍मीरियत और जम्‍हूरियत का फॉर्म्‍युला। 

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