Feb, 17, 2020
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जानिए मंगल पण्डे की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के बारे में…

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Education Desk : मंगल पण्डे का जन्म 19 जुलाई 1827 में उतर प्रदेश के बलिया जिला के नन्द गांव में हुआ था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बंगाल नेटिव इन्फ़्रेंडी के 34वे सैन्य दाल में एक भारतीय सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे। 29 मार्च 1857 को कोलकत्ता के निकट बैरकपुर में मंगल पण्डे ने ब्रिटिश सेना पर आक्रमण किया जिसमे ब्रिटिश के कुछ हवलदार घायल हुए। 

साथ ही इस हमले के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई का आगाज भी हुआ। मंगल पण्डे को सेनापति सार्जेट मेजर की हत्या करने से एक देशी सिपाही ने रोका। मंगल पण्डे की गिरफ्तारी हुई और सजाए मौत हुई। 8 अप्रैल 1857 को मंगल पण्डे को फांसी दी गई थी।  पर उन्होंने जो हिम्मत दिखाई उसकी मौत कभी नहीं हो सकती है।

मंगल पाण्डे को सवतंत्रता संग्राम का अग्रदूत कहा जाता है। मंगल पांडेय ने ब्रिटिश सरकार को हटाने के लिए उसके खिलाफ जो क्रांति की ज्वाला जलाई जिससे हर भारत वासी के दिल में दफन क्रांति की भावना उभर कर सामने आई। मंगल पाण्डे जो ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांति की ज्वाला भड़काई थी, उसे देख कर अंग्रेजी सरकार बहुत बुरी तरह से हिल गई थी। हलांकि सबके मिलने के बाद अंग्रेजी शासन को ख़त्म किया गया पर इसमें 100 साल लगा। 100 साल तक भारत के लोग अंग्रजो के गुलाम बनकर रहे थे। भारत सरकार ने 5 अक्टूबर 1984 में मंगल पाण्डे के सम्मान में एक डाक टिकट जारी की थी।मंगल पण्डे की जीवनी पर 2005 में हॉलीवुड में “मंगल पण्डे- दराईसिंग” नाम की फिल्म भी बनी थी।

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