Feb, 20, 2020
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लालकृष्ण आडवाणी ने तोड़ी चुप्पी, राजनीतिक सफर को किया याद

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National Desk : बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज एक अपनी चुप्पी तोड़ी, गांधीनगर से इस बार पार्टी ने उनका  टिकट काट दिया और अमित शाह को वहां से उम्मीदवार बना दिया है. टिकट कटने के बाद आज आडवाणी ने पहली बार अपने ब्लाग पर प्रतिक्रिया दी है. आडवाणी ने अपनी सार्वजनिक टिप्पणी में पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को लेकर कई अहम बातें कही. हालांकि आडवाणी के ब्लाग को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है. वहीं आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि हमने कभी भी राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन या देशविरोधी नहीं माना।

आडवाणी 6 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस से पहले यह ब्लॉग लिखकर गांधीनगर की जनता के प्रति आभार जताया है, गाधीनगर से वह 1991 के बाद 6 बार सांसद रह चुके है. लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया. पार्टी संस्थापक आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा उनकी जिंदगी का सिद्धांत रहा है- देश सबसे पहले, उसके बाद पार्टी और आखिर में खुद। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में उन्होंने इस सिद्धांत पर अटल रहने की कोशिश की है जो आगे भी जारी रहेगी। हालांकि पार्टी से टिकट कटने के बाद आडवाणी के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे है.

वहीं इससे पहले विरोधी पार्टियों ने भी टिकट कटने को लेकर आडवाणी के प्रति गहरी संवेदना जाहिर की थी और पीएम और अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता को ऐसा बाहर नहीं निकालना चाहिए.  

वहीं अपने ब्लॉग में आडवाणी ने अपने अभी तक के सफर को याद किया उन्होने बताया कि कैसे वह मात्र 14 साल की उम्र में आरएसएस में शामिल हुए और फिर वह पहले जनसंघ और बाद में बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हो गये. आडवाणी पार्टी के साथ करीब 7 दशकों तक जुड़े रहे।
खुद की पार्टी के अलावा आडवाणी ने सभी से पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों पर जोर देते हुए सभी दलों से आत्मनिरीक्षण की भी अपील की। 

आडवाणी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का सार उसकी विविधता और अभिव्यक्ति की आजादी है। उन्होंने लिखा, अपने जन्म के बाद से ही बीजेपी ने खुद से राजनीतिक तौर पर असहमति रखने वालों को कभी दुश्मन नहीं माना बल्कि उन्हें हमसे अलग विचार वाला माना है।

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