Feb, 17, 2020
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मोदी की बायोपिक के निर्माता पहुंचे सुप्रीमकोर्ट

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Enternational Desk : विवेक ओबराय की आने वाली फिल्म PM मोदी की बायोपिक है, यह फिल्म शुरू से ही विवादों से घिरी हुई है। इस फिल्म को रिलीज होने पर एक के बाद एक बंदिशे आती जा रही है। यह फिल्म 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी जिसपर बुधवार को चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है।अब यह फिल्म लोकसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद रिलीज की जाएगी।

इस फिल्म के निर्देशक, निर्माता और अहम भूमिका निभानेवाले विवेक ओबेरॉय ने आवाज उठाई है। इस फिल्म के निर्माता संदीप सिंह ने 11 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिसकी सुनवाई 15 अप्रैल को होनी है। इससे पहले भी इस फिल्म को लेकर मुंबई हाईकोर्ट में बहस हो चुकी है, जिसके निष्कर्ष पर 11 अप्रैल को इस फिल्म को रिलीज करने की तारीख तय की गई थी।  

इस फिल्म के निर्माता संदीप सिंह की क्रोध की ज्वाला काफी भड़क चुकी है। संदीप ने काफी सारे सवाल किए है इस फिल्म पर लगाए जाने वाले रोक को लेकर।  संदीप सिंह ने कहा है- जब खान्स फिल्म फ्लोर पर आने से पहले ही रिलीज तारीख की घोषणा कर देते है तब तो कोई विरोध नहीं करता है। 

संदीप ने कहा जब आमिर, सलमान और शाहरुख़ फिल्म के फ्लोर पर आने से ही रिलीज के तारीख की घोसना कर देते है कि यह फिल्म क्रिसमस, दिवाली, ईद, होली या 15 अगस्त को रिलीज की जाएगी तब तो कोई विरोध नहीं करता, तब तो कोई सवाल भी नहीं पूछता। वो स्टार्स है स्टार्टिंग से ही उनकी फिल्मे अच्छी कमाई करती है। 

मै भी एक निर्माता हु और अन्य निर्माताओं की तरह मै भी चाहता हु कि मेरी फिल्म अच्छी कमाई करे। लोगो को यह समझना चाहिए कि मैंने इस प्रोजेक्ट के पीछे करोड़ो खर्च किए है, फिर बार-बार क्या ऐसा करना सही है। मेरे हिसाब से 5 अप्रैल एक अच्छी तारीख थी फिल्म को रिलीज करने के लिए, लेकिन उसे बढाकर 11 अप्रैल कर दिया गया। फिर 11 अप्रैल पर भी फिल्म को रिलीज नहीं करने दिया गया। 

इस फिल्म पर विवाद शुरू हो गया, फिल्म के रिलीज़ डेट को 5 अप्रैल से बढ़ा कर 11 अप्रैल कर दी गई जो चुनाव से एक दिन पहले की थी। मैंने इस फिल्म के रिलीज होने की तारीख दिल्ली, मुंबई और मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट से लड़ाई जीत कर की थी। फिल्म के डिस्ट्रीव्यूटर भी सवाल खरे कर रहे है। फिल्म के प्रेस शो और स्क्रीनिंग भी होने वाली थी पर इस फिजूल के चक्कर में उसे भी कैंसिल करना पड़ा। इतना होने के बाद भी मैंने कानून के फैसले को माना पर जो हो रहा है वह गलत है।  

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