Feb, 17, 2020
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बिलकीस बानो को मिला इंसाफ…

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National Desk : मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में  बार फिर से बिलकिस बनो  केस की सुनवाई हुई जिस पर कोर्ट  फैसला सुनाते हुए कहा कि गुजरात सरकार को गैंगरेप पीड़िता बिलकीस बानो को 50 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने होंगे। कोर्ट ने गुजरात सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह नियमों के मुताबिक बिलकीस बानो को सरकारी नौकरी और रहने के लिए घर भी मुहैया कराए।

वहीं फैसला सुनाते वक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने गुजरात सरकार की स्थायी वकील हेमंतिका वाही से कहा कि आप खुद को भाग्यशाली समझे क्यों कि हमने आपकी सरकार के खिलाफ कोई फैसला नहीं सुनाया है। 

27 फरवरी को गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क गए थे जिसमे बड़े पैमाने पर जनसंहार हुआ। लेकिन बात यह यही खत्म नहीं हुई दंगे के कुछ दिन बाद 3 मार्च, 2002 को अहमदाबाद से 250 किमी दूर रंधीकपुर गांव में बिलकीस बानो के परिवार पर भीड़ ने हमला कर दिया, इस हमले में बिलकीस की 3 साल की बेटी सहित उसके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई।

जबकि हमले के बाद भी बिलकीस और उनके परिवार के 6 लोग जिंदा बच गए. जब हमला हुआ था उस वक्त बीलकिस की उम्र 19 साल थी और वह पांच माह की गर्भवती थी बावजूद उसके बिलाकिस के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। 

बिलकीस बानो ने हमले के अगले दिन यानी 4 मार्च 2002 को पंचमहल के लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करायी। जिसके बाद जांच शुरू हुई और बाद में इसे सीबीआई  को सौंप दिया गया। 

सीबीआई ने अप्रैल 2004 को अपनी चार्जशीट दाखिल की. जिसके बाद बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट में यह आशंका जाहिर की थी कि गवाहों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है और सीबीआई के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सकती है सुप्रीम कोर्ट ने बिलकीस बानो की मांग पर 6 अगस्त, 2004 को यह मामला मुंबई ट्रांसफर कर दिया.

जिसके बाद यूडी साल्वी की विशेष अदालत ने 21 जनवरी 2008 को दिए अपने फैसले में बिलकीस के साथ सामूहिक बलात्कार करने और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था।

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