Dec, 15, 2019
HOTLINE: 9594041704
BREAKING NEWS

होली मानाने के लिए कहां जाए और क्यों ?

Sharing is caring!

वैसे तो होली पुरे भारत में मनाई जाती है। होली के दिन कहा जाता है कि दुश्मनों के सामने आने पर भी क्रोध नहीं आता। होली के दिन हर वयक्ति खुश रहता है। हर किसी के घर में अलग-अलग तरह की पकवान बनाई जाती है और रंग गुलाल से होली खेली जाती है। काफी लोग होली के दिन भांग भी पीते है। हर जगह होली खेली जाती है लेकिन कुछ जगह विशेष तरह से होली खेली जाती है। जैसे अगर आप शाही होली देखना चाहते है तो उदयपुर की होली देखने जाए। यहाँ राजाओ के तरह होली मनाई जाती है। यहाँ होली की अवसर पर कई रंगारंग कार्यकर्म भी रखे जाते है।  

अगर आप सिख अंदाज में होली खेलना और देखना चाहते है तो पंजाब में आनंदपुर साहिब की होली जरूर देखिए। पर भारत में जहां सबसे जायदा दिन और सबसे जायदा मज़े के साथ होली मनाया जाता है वो है “ब्रज”, ब्रज की होली पुरे संसार में प्रसिद्ध है।  देश – विदेश से लोग यहाँ  होली देखने आते है। वैसे तो होली फाल्गुन महीने के पूर्णिमा को पुरे देश में मनाई जाती है, पर ब्रज में पुरे 40 दिन होली चलती है। ब्रज में होली की शुरुआत वसंत पंचमी से ही हो जाती है और फाल्गुन की पूर्णिमा तक चलती है। यहाँ महीनो पहले लोग होटलो की और रहने की जगहों को बुक कर लेते है। ब्रज की होली को लठमार होली कहते है। ऐसा कहां जाता है कि जब नन्द गांव के श्रीकृष्णा और उनके कई साथी मिलकर बरसाना की रानी राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलते थे और उस दौरान वे लोग राधा और दूसरे गोपियों पर गुलाल फेकते थे, तभी राधा और उनकी सखिया चिढ़कर कान्हा और उनके साथियों पर लाठियों की बरसात करती थी। साथ ही यहाँ इन दिनों रास भी होता था, राधा और कृष्णा के प्रेम का रास गोपियों के साथ। इसलिए आज भी ब्रज में बिलकुल उसी तरह होली मनाई जाती है।

बरसाना की होली

राधा और कृष्ण के प्रेम को लेकर होली के अवसर पर दो पंक्ति प्रस्तुत करना चाहूंगी।  

अनुपम होली खेले गोपिया बरसाना की, नन्द गांव के ग्वालो के दिल पर राज करे। बिना कहे ही लठो की बरसात करे, राधा और कृष्णा की ये प्रेम कहानी। राधा थी कृष्णा की प्रेम दीवानी, कृष्णा के रंग में राधा और राधा के रंग में रंगे थे कृष्णा। हर मोह के बंधन से अलग थी इनकी प्रेम कहानी, राधा बनी थी कृष्णा की प्रेम दीवानी।  रास करते थे सभी गोपियों के साथ, पर करते थे राधा के ह्रदय में निवास। कण – कण में उनकी बसी थी राधे, फिर क्यों जीवन पथ पर चल दिए थे रुक्मणि के साथ। राधा को रंग अपने प्रेम की रंग में, बिखेरे थे रंग रुक्मणि के जीवन में। कृष्णा की थी ये बात निराली, रंग गोपियों को अपने रंग में, शामिल हो जाते थे उनके जीवन में। मीरा का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ, कृष्णा के वश में उसका दिन और रात हुआ। कृष्णा थे चित चोर फिर भी न जाने क्यों, गोपियों के दिल में उठता था उनकी प्रेम का शोर।  राधा और कृष्णा की ये प्रेम कहानी, राधा थी कृष्णा की प्रेम दीवानी। 

By Aditi Neha

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of
Loading...