Sep, 22, 2019
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महाशिवरात्रि का महान पर्व: जानिए कैसे करे भोले बाबा को खुश !

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शिवरात्रि तो हर महीने में आती है पर महाशिवरात्रि साल में एक बार ही आती है।  जो फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का ये पर्व श्रवण नक्षत्र में पर रहा है।  श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा है। इस दिन सर्व सिद्धि योग भी है। इस वर्ष सयोगवश दिन भी सोमवार पड़ा है जो की बहुत ही शुभ है चुकी सोमवार दिन शिव का ही दिन है चुकी इस वर्ष दिन है जो की शिव जी का और शिवरात्रि की वजह से रात्रि भी शिव की। 

वैसे हम सब भी शिव के ही बच्चे है , और महाशिवरात्रि का व्रत और उनकी पूजा अर्चना करके उनकी वंदना करके उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते ताकि वो हमारे कष्टों का निवारण कर हमे सुखद जीवन प्रदान करे।  महाशिवरात्रि इस लिए मनाया जाता है चुकी इस दिन ही शिव और शक्ति एक हुए थे।  माता पार्वती और शंकर जी का विवाह संपन्न हुआ था। 

जब माता सती  ने शंकर जी का अनादर होने की वजह से आत्मदाह किया था तब शंकर जी गुस्से से तांडव कर रहे थे फिर उन्हें शांत  करने के लिए ब्रम्हा जी और अन्य देवताओ ने उनकी आराधना की।  फिर जब सती ने दूसरा जन्म माता पार्वती के रूप में लिया तब सभी देवताओ ने मिलकर माता पार्वती पर शंकर जी की शादी करवाई।  

माता पार्वती ने गंगा किनारे शिवलिंग बना कर के शिव का अभिषेक किया था फलसवरूप जी उन्हें शंकर जी मिले।  इसलिए जो महाशिवरात्रि की साधना उपासना सच्चे और निःस्वार्थ भावना से करता है उस पर शिव की कृपा हमेशा बनी रहती है।  

ऐसा माना  जाता है की जो भी कुवारी लडकिया इस व्रत को निर्जल रखती है और शिव की पूजा अर्चना करती है उन्ह्र फलसवरूप अच्छा पति मिलता है और उसकी सारी मनोइक्षा भी पूरी होतीहै।  जो भी इस व्रत को करता उसे यश की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि में रुद्राभिषेक की और महाम्रत्युन्जय जप की अधिक मान्यता दी जाती है।  

अभिषेक कई प्रकार से होते और ऐसा कहा जाता है की हर किसी का अलग अलग पुण्य प्राप्त होता है। मनोकामना की पूर्ति के लिए गाय के दूध से रूद्राभिषेक किया जाता है। निरोग रहने के लिए कुश को पिस कर गंगा जल में मिलाकर उससे अभिषेक करना चाहिए।  

धन प्राप्ति के लिए गाय  के घी से अभिषेक करना चाहिए।  

बिशेष उद्देश्य पूर्ति के लिए तीर्थ अस्थालो  के नदियों के जल से अभिषेक करना चाहिए।  

बैभव प्राप्ति के लिए गन्ने की रस से अभिषेक करना चाहिए।  

जीवन में दुःख न आए जीवन सुखी रहे उसके लिए शहद से अभिषेक करना चाहिए।  

दीर्घायु होने के लिए महामृत्युंजय का जप करवाना चाहिए।       

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