Sep, 22, 2019
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अमेरिका ने दी चीन को सख्त चेतावनी, कहा चीन कर रहा है बेवकूफी

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भारत और पाकिस्तान के बिच काफी बुरे हालात चल रहे है, अभी ऐसे में हर देश की कोशिश बस इतनी है कि दोनों देशो के बिच शांति बानी रहे। पिछले 10 सालो में चौथी बार चीन ने नासुद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाया है। जिस वजह से भारत के साथ – साथ कई अन्य देश भी चीन के खिलाफ हो गए है। यूएन में बिटो सदस्य होने का फायदा हर बार चीन उठता है। इस बार अमेरिका ने चीन खुलेआम चेतावनी दी है कि अगर उसने अब दखल दिया तो हमे दूसरा रास्ता अपनाना भी आता है। इसलिए चीन समझदारी से काम ले। आपको बता दे कि भारत ने 2009 में पहलीबार यूएन में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने के लिए प्रस्ताव दिया था, पर चीन ने सहमति नहीं जताई थी जिस कारण से मसूद अजहर बच गया था। 2016 में भारत ने फिर अमेरिका, यूके और फ्रांस के साथ मिलकर अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव यूएन को दिया था। इस प्रस्ताव में कहा था कि जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमले का मास्टरमाइंड कोई और नहीं मसूद अजहर ही है। उस वक़्त भी चीन  की सहमति न होने की वजह से कुछ नहीं हो पाया। 2017 में भारत, अमेरिका, यूके और फ़्रांस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया था। हर बार की तरह चीन ने इसका बिरोध किया।

भारत में एक बार फिर 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले के बाद अजहर के खिलाफ करवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव दिया। जिसमे अमेरिका, फ़्रांस  और ब्रिटेन ने मिलकर 27 फरवरी को यूएन में इस करवाई के लिए प्रस्ताव दिया था। साथ ही अन्य 10 देशो ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। जिसका फैसला 12 मार्च (बुधवार की रात 12:00 बजे ) तक होना था। समय ख़त्म होने से ठीक 1 घंटा पहले चीन ने अपना रंग दिखा दिया, और अपनी वीटो पॉवर का इस्तेमाल करते हुए कहा बिना साबुत के करवाई करना होगा गलत, मै समर्थन नहीं कर सकता इस प्रस्ताव का। चीन की वजह से अजहर चौथी बार बच गया वैश्विक आतंकी घोसित होने से। चीन की इस करतूत की वजह से भारत, अमेरिका और अन्य देश काफी निराश है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा – चीन के रवैए से निराशा हुई। आतंकियों के खिलाफ हमारी कोशिशें जारी रहेंगी। भारत ने प्रस्ताव लाने और उसका समर्थन करने वाले देशों को धन्यवाद कहा।

इस बीच यूएनएचसी के सदस्यों ने चीन को चेतावनी दी है। चीन से कहा गया है कि अगर वह मसूद अज़हर को लेकर अपने रवैया को नहीं बदलेगा तो दूसरी कार्रवाई के विकल्प हैं हमारे लिए। रॉबर्ट पलाडिनो ने कहा, ‘अमेरिका और चीन के आपसी तालमेल अच्छी हैं। दोनों देश क्षेत्रीय स्थायित्व और शांति लाना चाहते हैं, लेकिन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयासों को नाकाम करने से यह लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा।’  चीन का बार-बार अजहर को बचाने के पीछे बहोत बड़ा स्वार्थ है। पाकिस्तान में 7 लाख करोड़ का निवेश करने का लक्ष्य है चीन का। अभी पाकिस्तान में जितनी विदेशी कम्पनिया है उसमे सबसे जायदा चीन की कम्पनी (77)है, और साथ ही चीन भारत से अपनी जाती दुश्मनी निकलना चाहता है चुकी भारत ने दलाई लामा को अपने देश में रहने की आजादी दी थी। चीन का कहना है की जैसे भारत के लिए मसूद अजहर है वैसे ही हमारे लिए दलाई लामा।  

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